Shayrix.com पर आपका स्वागत है, अगर आप झूठे और दिखावटी लोगों के असली चेहरे को शब्दों में दिखाना चाहते हैं, तो आप सही जगह पर आए हैं। यहाँ आपको Fake People Shayari in Hindi का दमदार कलेक्शन मिलेगा, जो लोगों की असलियत को साफ-साफ बयान करता है। ये शायरियां उन लोगों के लिए हैं, जो धोखे और फेक रिश्तों से तंग आ चुके हैं।
यहाँ मौजूद सभी शायरियों को आप आसानी से Copy and Paste करके WhatsApp, Facebook या Instagram पर आप इस्तेमाल कर सकते हैं। यहाँ आपको Attitude Shayari, Betrayal Shayari और Truth Shayari का भी शानदार कलेक्शन मिलेगा, जिससे आप अपनी बात खुलकर रख सकते हैं।
Fake People Shayari In Hindi

गिरगिट भी अब शर्मिंदा है लोगों के रंग देखकर,
कमाल का हुनर रखते हैं लोग पल भर में बदलने का।
चेहरे पर हँसी और दिल में जहर रखते हैं,
आजकल के लोग गैरों से ज्यादा अपनों पर नजर रखते हैं।
मतलब की दुनिया थी इसलिए छोड़ दिया सबसे मिलना,
वरना ये छोटी सी उम्र तन्हाई के काबिल नहीं थी।

वफा की उम्मीद अब किससे करें हम,
यहाँ तो लोग दुआओं में भी अपना फायदा ढूंढते हैं।
बड़ा अजीब है ये दुनिया का दस्तूर भी,
पीठ पीछे बुराई और सामने सलाम करते हैं।
आईना भी अब डरने लगा है इंसान की फितरत से,
क्योंकि असली चेहरा तो नकाबों के पीछे छुपा होता है।

जुबान पर मिठास और दिल में खंजर रखते हैं,
दिखावे के लोग अक्सर बहुत ही खतरनाक होते हैं।
भीड़ बहुत है इस मतलबी शहर में,
एक हम ही सादे निकले जो सबको अपना समझ बैठे।
यहाँ किसी के दर्द की कोई दवा नहीं है,
लोग तो बस तमाशा देखने का बहाना ढूंढते हैं।
कड़वा तो बहुत है पर यही सच है जनाब,
आजकल की दुनिया में असली कम और नकली ज्यादा मिलते हैं।
Shayari On Fake Friends In Hindi

दोस्ती के लिबास में जो दुश्मनी निभाते हैं,
वक्त आने पर वही सबसे गहरा जख्म दे जाते हैं।
वफ़ा की उम्मीद थी जिनसे हमें,
वही बेवफाई का हुनर दिखा बैठे।
मतलब का वजन बहुत भारी होता है,
जब निकल जाता है तो दोस्ती का रिश्ता हल्का पड़ जाता है।

चेहरे पर नकाब और दिल में नफरत रखते हैं,
आजकल के दोस्त गैरों से ज्यादा गहरी चाल चलते हैं।
भीड़ बहुत थी मेरे पास जब जेब में पैसे थे,
वक्त क्या बदला पता चला कौन अपने और कौन कैसे थे।
गिरगिट से ज्यादा रंग बदलते देखे हैं मैंने,
दोस्ती के नाम पर दुश्मन पलते देखे हैं मैंने।

दुआ करो कि मैं फिर से अकेला हो जाऊँ,
ये दिखावे की दोस्ती अब मुझे रास नहीं आती।
वो हाथ तो मिलाते रहे हमसे उम्र भर,
मगर दूसरे हाथ में हमेशा नमक छुपा रखा था।
पहचानना मुश्किल है यहाँ कौन अपना है,
दोस्ती का लिबास ओढ़कर यहाँ हर कोई सपना है।
शुक्रिया उन मतलबी दोस्तों का भी,
जिन्होंने मुझे अकेले लड़ना सिखा दिया।
Fake Friend Shayari For Girl In Hindi

सहेली बनकर जो राज जान लेती हैं,
वक्त पड़ने पर वही सबसे ज्यादा डसती हैं।
चेहरे पर प्यारी मुस्कान और दिल में जलन रखती हैं,
आजकल की सहेलियाँ गैरों से ज्यादा नजर रखती हैं।
साथ चलने का वादा था जिनका ताउम्र,
वो बीच राह में हाथ छोड़ना बखूबी जानती हैं।

यकीन करना छोड़ दिया है अब मीठी बातों पर,
दिखावे की सहेलियों को अब दूर से ही सलाम है।
भीड़ कम ही अच्छी है अब मेरी जिंदगी में,
मतलबी सहेलियों से तो मेरी तन्हाई भली है।
जो पीठ पीछे बुराई और सामने तारीफ करती हैं,
ऐसी लड़कियों से हम अब वास्ता नहीं रखते।

मेरी कामयाबी पर जो नकली मुस्कान लाती हैं,
वो दोस्त नहीं बस जलने का बहाना ढूंढती हैं।
गिरगिट सा रंग बदलते देखा है मैंने उन्हें,
जिन्हें कभी मैं अपनी सबसे पक्की सहेली कहती थी।
मतलब निकल गया तो अब पहचानती भी नहीं,
वही जो कल तक मुझ पर जान छिड़कती थी।
शुक्र है खुदा का कि असली चेहरा दिखा दिया,
वरना मैं तो आज भी उन्हें अपनी जान मानती थी।
Fake Log Shayari

नकाबों का बाजार है और सब खरीदार हैं,
यहाँ मासूम दिखने वाले ही सबसे बड़े कलाकार हैं।
वफा की तलाश में निकले थे हम मगर,
जिधर देखो उधर दगाबाज और गद्दार हैं।
मतलब की मिठास घुली है सबकी बातों में,
ज़हर छिपा रखा है सबने अपनी ही मुलाकातों में।

सलीका तो देखो उनके झूठ बोलने का,
सच भी शरमा जाए उनके मुँह खोलने का।
भीड़ बहुत है पर दिल के सब खाली हैं,
ये दिखावे की दुनिया बड़ी ही जाली है।
गिरगिट ने तो बस रंग बदला था कभी,
इंसानों ने तो यहाँ ईमान ही बदल दिया।

दुआ करो कि कभी किसी से काम न पड़े,
वरना अपने भी यहाँ पहचानने से मना कर देते हैं।
सादगी को हमारी कमजोरी समझ बैठे वो,
जो पीठ पीछे हमारी कब्र खोद रहे थे।
अब किसी के आने-जाने का गम नहीं होता,
नकली लोगों के लिए अब दिल नरम नहीं होता।
तजुर्बा कहता है कि अकेले ही रहना ठीक है,
दिखावे की महफिलों से तो अपनी तन्हाई नेक है।
Fake People Shayari 2 Line In Hindi

चेहरों के पीछे कई चेहरे लगाते हैं लोग,
अंदर जहर और बाहर अपनापन दिखाते हैं लोग।
वफादारी की उम्मीद अब मिट्टी में मिला दी हमने,
क्योंकि अपनों के हाथों में ही अक्सर खंजर देखे हैं हमने।
कद्र उनकी करो जो दिल से तुम्हारे हैं,
वरना यहाँ जुबान के मीठे तो सभी सारे हैं।

आईने की तरह साफ रिश्ता रखने की कोशिश मत करना,
यहाँ लोग पत्थर लेकर तैयार खड़े हैं वार करने को।
जरूरत पड़ने पर पैर पकड़ते हैं और काम निकलने पर पहचानते नहीं,
ऐसे दोगले लोगों को अब हम अपना मानते नहीं।
तजुर्बे ने सिखा दिया है अब खामोश रहना,
क्योंकि मीठा बोलने वाले ही अक्सर कड़वे जख्म देते हैं।

जो कहते थे कि मर जाएंगे तुम्हारे बिना,
आज वो गैरों की महफिल में हमारी बुराई करते हैं।
दिखावे की महफिल से तन्हाई हजार गुना अच्छी है,
कम से कम अपनी खामोशी तो एकदम सच्ची है।
मतलब के रिश्तों में बस इतना ही दम होता है,
स्वार्थ खत्म होते ही इंसान का लहजा बदल जाता है।
अब न किसी से शिकवा है और न ही कोई गिला,
खैरियत है कि वक्त रहते ही सबका असली चेहरा मिला।
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